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सोने की खदान की नीलामी से केंद्र सरकार को 50 हजार करोड़ रुपये मिलने की संभावना

Written by  Published in Business Saturday, 31 December 2016 07:56
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खदानों की नीलामी के मामले में केंद्र सरकार का राजस्व (रेवेन्यू) 50,000 करोड़ रुपए तक बढ़ने की उम्मीद है।

 

कोर्ट ने सभी प्रमुख खनिज खदानों की लीज (पट्टे) के लिए लंबित आवेदनों को निरर्थक करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बीते वर्ष यूपीए सरकार की ओर से कोल ब्लॉक आवंटन में अनियमितता बरतने के बाद उसे अवैध करार दिया था।

 

 जिसके बाद खान और खनिज (विकास और विनियमन) एक्ट में संशोधन के जरिये नीलामी का रास्ता तैयार किया गया था।

 

सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि प्राकृतिक संसाधन (नैचुरल रिसोर्स) राष्ट्र की संपत्ति हैं। इन्हें नीलामी के जरिये ही किसी को दिया जाना चाहिए।

 

मुश्किल तब खड़ी हुई जब देश के कई हाई कोर्ट ने प्रमुख खनिजों की निकासी के लिए खनन लीज प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार के पास लंबित पड़े आवेदनों की स्थिति के बारे में परस्पर विरोधी निर्णय दिया।

 

 कुछ हाई कोर्ट ने कहा कि इन आवेदकों के पास लीज प्राप्त करने की वैध उम्मीद है। इन खदानों की नीलामी के जरिए सरकार को करीब 50,000 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है।

 

भूषण पॉवर एंड स्टील लिमिटेड ने ओडिशा के संबलपुर जिले में एक लोहा और इस्पात संयत्र (आयरन एंड स्टील प्लांट) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था।

 

. साथ ही पास के इलाकों में लीज हासिल करने के लिए आवेदन किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में वर्ष 2012 में आदेश देते हुए राज्य सरकार से भूषण स्टील को दो ब्लॉक में खनन पट्टा देने के लिए केंद्र से सिफारिश करने को कहा था।

 

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बबल और पी. चिदंबरम ने भूषण स्टील की तरफ से पेश होते हुए कहा कि राज्य सरकार ने कंपनी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं इसलिए वह अपना फैसला वापस नहीं ले सकती है।

 

 उन्होंने यह भी तर्क दिया कि राज्य सरकार ने खनन के पट्टे के लिए केंद्र से याचिकाकर्ता कंपनी के नाम की सिफारिश की थी,

 

जिस वजह से केंद्र एमएमडीआर एक्ट और नियमों में संशोधन के आधार पर पट्टा देने से मना नहीं कर सकता है। दोनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2012 के फैसले को न मानकर राज्य सरकार ने कोर्ट की अवमानना की है।

 

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने केंद्र की तरफ से पेश होते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल ओडिशा सरकार को भूषण स्टील को लौह अयस्क (आयरन ओर) खनन पट्टा अनुदान देने की सिफारिश करने को कहा था,

 

जो कि हो चुका है। इसलिए राज्य सरकार की ओर से न्यायालय की अवमानना का कोई सवाल ही नहीं उठ सकता।

 

 

 

 

 

 

 

 

Read 22 times Last modified on Saturday, 31 December 2016 08:00

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